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"भूख की कोई जाति नहीं,
न रोटी की कोई भाषा है"

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अस्त्र और शस्त्र में क्या फर्क है !
अस्त्र और शस्त्र दोनों ही युद्ध में इस्तेमाल होने वाले “आयुध” (हथियार) हैं लेकिन इनका अर्थ और उपयोग थोड़ा अलग है !
Swarn Singh
32 minutes ago1 min read


रील के जमाने में किताबें कौन पढ़ता है ?
आज की सुबह आपकी कैसे शुरू हुई? शायद अलार्म बंद करने के बाद पहला काम स्क्रीन को 'स्क्रॉल' करना रहा होगा।
Swarn Singh
21 hours ago4 min read


संन्यास का साम्राज्य !
स्वामी विवेकानंद: एक असाधारण 'फकीर' की कहानी"
Swarn Singh
2 days ago6 min read


विधवा माँ
मैं कोई तस्वीर नहीं थी जो मरने के बाद सजाई जाए, मैं कोई कहानी नहीं थी जो मरने के बाद सुनाई जाए ! "मी काही अशी चित्र नव्हते की माझ्या मरणानंतर सजवली जाईल, मी काही अशी कथा नव्हते की माझ्या मरणानंतर सांगितली जाईल." “I was not a picture to be adorned after my death; I was not a story to be told only after I was gone.” मेरी यह रचना केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि एक सत्य घटना का वह दर्दनाक दस्तावेज है, जो हर संवेदनशील हृदय को झकझोर कर रख देगा। यह कहानी एक ऐसी माँ की है,...
Swarn Singh
3 days ago3 min read


Battle of बहराइच: महाराजा सुहेलदेव
यह एक बहुत ही प्रभावशाली और ऐतिहासिक विषय है। महाराजा सुहेलदेव की वीरता की गाथा !
Swarn Singh
3 days ago4 min read


“बिहार” उनके भीतर अब भी वैसा ही है" “Bihar” still lives within them just the same "
समय की धूल में दबे हुए कुछ नाम होते हैं, जो मिटते नहीं… बस दूर चले जाते हैं ।
Swarn Singh
6 days ago5 min read


सऊदी अरब का NEOM :-भविष्य का आईना या वर्तमान का अँधेरा?
रेगिस्तान की रेत पर जब कोई सपना उगाया जाता है,तो वह सिर्फ कंक्रीट और शीशे का ढाँचा नहीं होता वह इंसानों की सांसों, उम्मीदों और कभी-कभी उनकी पीड़ाओं से भी बनता है।
सऊदी अरब का NEOM प्रोजेक्ट, और उसका सबसे चर्चित हिस्सा “The Line”,आज दुनिया के सामने एक सवाल बनकर खड़ा है क्या यह सच में भविष्य की सभ्यता है या फिर विकास के नाम पर दबा दी गई आवाज़ों की एक लंबी कहानी
Swarn Singh
Mar 203 min read


कटाक्ष :-जिसकी जितनी संख्या भारी, क्या वाकई उसकी उतनी हिस्सेदारी?"“Does greater numbers truly guarantee an equal share?”
जिसकी जितनी संख्या भारी, क्या वाकई उसकी उतनी हिस्सेदारी?"
Swarn Singh
Mar 177 min read


राजपूतों का शौर्य और उसकी वीरता: भारतीय इतिहास की अमर गाथा
"जहाँ-जहाँ भी उठीं तलवारें, वहाँ-वहाँ इतिहास बना,
मरकर भी जो अमर रहा, वो राजपूती विश्वास बना।
रक्त की हर इक बूँद से धरती का अभिषेक हुआ,
बलिदानों की ज्वाला से, युग-युग तक आलोक हुआ।
स्वाभिमान की वेदी पर जो, हँसकर शीश चढ़ा जाते,
एक वचन की खातिर अपना, जीवन सहज लुटा जाते।
Swarn Singh
Mar 1410 min read


जैसी करनी, वैसी भरनी: वैश्विक राजनीति और कर्मों का हिसाब
मेरे हाईस्कूल के दिनों में हमारे अंग्रेजी के शिक्षक, जयकृष्ण यादव जी, एक बात अक्सर दोहराया करते थे: "As you sow, so shall you reap"
Swarn Singh
Mar 132 min read


लोकतंत्र में वंशवाद:राजा का बेटा अब भी राजा:-
भारतीय राजनीति के मंच पर एक संवाद सबसे अधिक गूँजा है: "राजा का बेटा अब राजा नहीं बनेगा, बल्कि वही राजा बनेगा जो उसका हकदार होगा।" यह कथन सुनने में जितना लोकतान्त्रिक और आदर्शवादी लगता है, वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में इसकी वास्तविकता उतनी ही धुंधली दिखाई पड़ती है। जब नेतृत्व की कमान योग्यता के बजाय वंशावली के आधार पर सौंपी जाती है, तो यह न केवल लोकतंत्र की मूल भावना पर चोट करता है, बल्कि नागरिकों के भरोसे को भी कमज़ोर करता है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति समान अवसर है। जब राजनीत
Swarn Singh
Mar 111 min read


प्राचीन ईरान और भारत:-
नदियाँ बड़ी विचित्र होती हैं वे पहाड़ों के पार जाती हैं,रेगिस्तानों से गुजरती हैं,और सदियों
बाद किसी दूसरी धरती पर फिर से जीवन बनकर उभरती हैं।
Swarn Singh
Mar 101 min read


शीर्षक: ये कैसा भाईचारा है ? Title: What Kind of Brotherhood Is This?
यह कविता वर्तमान समय के सबसे ज्वलंत और संवेदनशील प्रश्नों पर खड़ी है। इसे लिखते समय यदि मेरी कलम में थोड़ी साम्प्रदायिकता की गंध आती है, तो मैं पूरी ईमानदारी और विनम्रता के साथ इसे स्वीकार करता हूँ। अक्सर 'साम्प्रदायिकता' शब्द का प्रयोग उग्र धार्मिकता के संदर्भ में किया जाता है, तो हाँ, मैं उग्र हूँI मैं ऐसा था नहीं, लेकिन परिस्थितियों ने मुझे ऐसा होने पर विवश कर दिया है। इसके लिए मेरे पास पुख्ता वजह भी है I हो सकता है आप मुझे 'कलम का दंगाई' कहें I आपकी कट्टरता तो धर्मनिरपेक्षत
Swarn Singh
Mar 610 min read


गाँव का सूनापन: आखिर कहाँ गए सब लोग?“The Silence of the Village: Where Has Everyone Gone?”
यह कविता मेरे हृदय के सर्वाधिक निकट है, क्योंकि यह मात्र कोरी कल्पना नहीं, बल्कि एक 'भोगा हुआ यथार्थ' है। इसका भुक्तभोगी मैं स्वयं हूँ और मेरा गाँव भी। यह पंक्तियाँ मेरी आपबीती हैं, जो पलायन के उस दंश और पीड़ा को बयां करती हैं जिसने न जाने कितने घरों के चिरागों को उनसे दूर कर दिया है। इस दर्द की गवाही मेरे गाँव में खड़ा मेरा अपना दो-मंजिला मकान देता है, जो आज वीरान और खाली पड़ा है। दीवारें तो हैं, पर उनमें गूंजने वाली किलकारियां नहीं। दरवाजा तो है पर उसमें खेलने वाले बच्चे नहीं
Swarn Singh
Mar 63 min read


हमें और मत बाँटो:-एक आम आदमी की पुकार “Don’t Divide Us Any Furhter"
यह मेरी पहली कविता, जो मेरी पुस्तक का शीर्षक भी है, सिर्फ शब्दों में बुनी कोई 'कविता' नहीं है। यह एक 'चीत्कार' है, एक करबद्ध निवेदन है और देश की राजनीति के शीर्ष पर बैठे उन तमाम सत्ताधीशों से एक आग्रह है "हमें और मत बाँटिये ! This is my first poem, which also serves as the title of my book. It is not merely a “poem” woven in words—it is a cry, a folded-hands appeal, and a heartfelt plea to those seated at the highest echelons of power in this country: “Do not divide us any fu
Swarn Singh
Mar 65 min read


द केरल स्टोरी पार्ट 2: मनोरंजन नहीं, एक जागरूकता अभियान “The Kerala Story Part 2: Not Entertainment, but an Awareness Campaign.”
'द केरल स्टोरी पार्ट 2' महज एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय समाज के उस छद्म नकाब को तार-तार करने वाला एक वैचारिक प्रहार है, जिसे अक्सर 'सेक्युलरिज्म' की चादर में लपेटकर सुरक्षित रखा जाता था। इस बार निर्देशक ने किसी भी प्रकार के 'परहेज' या 'पॉलिटिकल करेक्टनेस' को ताक पर रखकर उस कड़वे यथार्थ को पर्दे पर उतारा है, जिससे दुनिया अक्सर आंखें चुराती रही है। "सिनेमा जब जिम्मेदारी बनता है, तब 'केरल स्टोरी' जैसी फिल्में जन्म लेती हैं।" सत्य की नग्न प्रस्तुति और 'गजवा-ए-हिंद' का पर्दाफा
Swarn Singh
Mar 65 min read


खामनेई की मौत और एक भारतीय नागरिक की दुविधा ! “The Death of Ali Khamenei and the Dilemma of an Indian Citizen.”
लोग वीकेंड पर एन्जॉय करते हैं, घूमने जाते हैं, सिनेमा देखते हैं, मैच देखते हैं ,लेकिन इस बार वीकेंड पर दो दिन से हम लोग युद्ध देख रहे हैं।समझ नहीं आ रहा कि एक भारतीय होने के नाते अली खामनेई की मौत पर मातम मनाऊँ या Israel और United States की इस कार्रवाई पर खुशी जाहिर करूँ ? सच कहूँ तो बहुत बड़ी दुविधा में हूँ। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते सिर्फ इसलिए खुश नहीं हो सकता कि खामनेई मुसलमान थे। ईरान और इज़राइल दोनों ही किसी न किसी रूप में भारत के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। अमेरिका
Swarn Singh
Mar 19 min read


UGC, विश्वास और भविष्य की आशंकाएँ "UGC, Trust, and the Uncertainties of the Future"
UGC से संबंधित हालिया विमर्श में माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी ने यह आश्वासन दिया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य कथन है। जब नीति निर्माण के केंद्र में निष्पक्षता और न्याय की बात कही जाती है, तो स्वाभाविक रूप से भरोसा जन्म लेता है। निस्संदेह, हमें वर्तमान नेतृत्व की नीयत और प्रतिबद्धता पर विश्वास है। किंतु एक विनम्र प्रश्न भी उतना ही स्वाभाविक है—क्या यह भरोसा केवल व्यक्तित्व पर आधारित रहे
Swarn Singh
Feb 205 min read



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