हर वर्ष परशुराम जयंती पर सोशल मीडिया के 'डिजिटल योद्धा' अपने कीबोर्ड से वीरता की नदियाँ बहा देते हैं। खुद को "परशुराम का वंशज" बताने वाले अति-उत्साही युवक यह भूल जाते हैं कि मुनिवर आजीवन अविवाहित थे। लेकिन विडंबना देखिए, जिस कश्मीर की धरती से कश्मीरी पंडितों (सारस्वत ब्राह्मणों) को मुसलमानो ने लहूलुहान कर भगा दिया, वहाँ आज तक कोई "आधुनिक परशुराम" अपना फरसा लेकर नहीं पहुँचा। गोवा में पुर्तगालियों ने इतने जुल्म ढाये, इतनी यातना दी लेकिन कभी किसी का फरसा नहीं निकला ! वीरता केवल