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"भूख की कोई जाति नहीं,
न रोटी की कोई भाषा है"

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वटवृक्ष: राजपूत चौहान वंश : रजवाना से सहवान तक: इतिहास और वर्तमान
वटवृक्ष:चौहान वंश: रजवाना से सहवान तक
Swarn Singh
4 days ago5 min read


पंडित राम प्रसाद बिस्मिल
राम प्रसाद बिस्मिल तोमर राजपूत (क्षत्रिय) परिवार से थे ! उनके पिता का नाम मुरलीधर और दादा नारायण लाल थे। परिवार मूल रूप से मुरैना (मध्य प्रदेश) के बरबई गांव (तोमरधार क्षेत्र) से था, जो बाद में शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश) में बस गया। वे तोमर राजपूत वंश के थे, जो एक प्रमुख क्षत्रिय समुदाय है। "पंडित" उपाधि क्यों? "पंडित राम प्रसाद बिस्मिल" नाम से वे प्रसिद्ध हैं, लेकिन यह उपाधि (honorific title) थी। आर्य समाज से जुड़ने और उनकी विद्वत्ता (हिंदी, उर्दू, संस्कृत ज्ञान) के कारण स्थान
Swarn Singh
7 days ago1 min read


जागीरदार और जमींदार : अंतर और भूमिका
जमींदार और जागीरदार में अंतर
Swarn Singh
May 214 min read


क्षत्रिय धर्म और क्षात्र धर्म !
"क्षत्रिय धर्म" और गौतम बुद्ध का "क्षात्र धर्म" दोनों उसी भारत की दो धाराएँ हैं, एक बाहरी युद्ध की, दूसरी भीतर के युद्ध की। भारत की मिट्टी में एक अद्भुत परंपरा रही है यहाँ तलवार भी पूजी गई है और तप भी। यहाँ रणभूमि में वीरता का जयघोष हुआ है, तो वन की नीरवता में आत्मा की पुकार भी सुनी गई है। इसी परंपरा के दो शिखर हैं एक, पारंपरिक क्षत्रिय धर्म और दूसरा, गौतम बुद्ध का विकसित क्षात्र धर्म। पहली दृष्टि में ये दोनों विपरीत प्रतीत होते हैं, पर गहराई में उतरें तो यह एक ही यात्रा के द
Swarn Singh
May 163 min read


Top Hindi Social Issue Poems: Voices That Stir the Soul
Poetry has always been a powerful medium to reflect society’s truths. In Hindi literature, poems on social issues hold a special place. They speak directly to our hearts and minds, urging us to think, feel, and act. These poems are simple yet profound. They use everyday language to highlight problems that affect us all. From inequality to corruption, from poverty to gender bias, Hindi social issue poems bring these topics to light with gentle but firm words. I have always fou
Swarn Singh
May 134 min read


भाषा का तमाशा !
इंसान को सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह 'बोल' सकता है, इसलिए वह श्रेष्ठ है। जबकि हकीकत यह है कि हमारी बोलियों ने हमें जितना अलग किया है, उतना सरहद की कटीली तारों ने भी नहीं किया ! मैं देश के कई राज्य में रहा हूं और लगभग बहुत सारे राज्यों में घूम चुका हूं मैने देखा सुदूर पूर्वोत्तर के किसी गाँव में कुत्ता भौंकता है, तो उसकी आवाज़ महाराष्ट्र के कुत्ते से अलग नहीं होती। कोयल चाहे बंगाल में गाए या पंजाब में, उसकी “कुहू” एक-सी मधुर रहती है। कौवा बिहार का हो या केरल का, उसकी “कांव-कांव”
Swarn Singh
May 122 min read


अब 'विश्वगुरु' बनना बाकी है !
बस अब विश्वगुरु बनना बाकी है !
Swarn Singh
May 22 min read


मजदूर दिवस की शुरुआत कैसे हुई?
तपती धूप में खुद को जलाकर, वो औरों का घर सजाता है, नसीब उसका मिट्टी में है, फिर भी वो सोना उगाता है। मज़बूत इरादे और थके पाँव, यही उसकी असल पहचान है, न थकता है न झुकता है, वो इस जमीं का मान है। वो नींव का पत्थर है साहब, जो शोर कभी नहीं करता, उसी के दम पर खड़ा ये सारा, बुलंद हिंदुस्तान है। मजदूर दिवस (अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस या मई दिवस) हर साल 1 मई को मनाया जाता है। यह दुनिया भर के मजदूरों के अधिकारों, उनके संघर्ष और बलिदान को समर्पित दिन है। इसकी जड़ें 19वीं शताब्दी के अमेरि
Swarn Singh
May 12 min read


Download Timeless Hindi Poetry Online: Embracing Digital Hindi Poetry
Hindi poetry has a unique way of touching the soul. It speaks of love, loss, hope, and the many shades of life. Over the years, I have found that poetry is not just words on paper. It is a living, breathing expression of our deepest feelings and thoughts. Today, with the rise of digital platforms, accessing timeless Hindi poetry has become easier than ever. Downloading digital Hindi poetry allows us to carry these emotions wherever we go. It also helps preserve the rich herit
Swarn Singh
Apr 284 min read


The Power of Hindi Protest Poetry - Protest Poetry Insights
Hindi protest poetry holds a unique place in the world of literature. It is not just about words arranged in rhythm and rhyme. It is a voice that speaks for the unheard, a mirror reflecting society’s struggles, and a call to action. When I dive into Hindi protest poetry, I find a powerful blend of emotion and reason. It moves gently but firmly, urging us to think and feel deeply about social and political realities. This poetry is more than art. It is a form of resistance. It
Swarn Singh
Apr 274 min read


कलयुग में कलयुगी विभीषण
कलयुग में भी कलयुगी विभीषण, kalyugi-vibhishan-hindi-poem
Swarn Singh
Apr 211 min read


ऋषि परशुराम: शौर्य, शास्त्र और सोशल मीडिया का भ्रम
हर वर्ष परशुराम जयंती पर सोशल मीडिया के 'डिजिटल योद्धा' अपने कीबोर्ड से वीरता की नदियाँ बहा देते हैं। खुद को "परशुराम का वंशज" बताने वाले अति-उत्साही युवक यह भूल जाते हैं कि मुनिवर आजीवन अविवाहित थे। लेकिन विडंबना देखिए, जिस कश्मीर की धरती से कश्मीरी पंडितों (सारस्वत ब्राह्मणों) को मुसलमानो ने लहूलुहान कर भगा दिया, वहाँ आज तक कोई "आधुनिक परशुराम" अपना फरसा लेकर नहीं पहुँचा। गोवा में पुर्तगालियों ने इतने जुल्म ढाये, इतनी यातना दी लेकिन कभी किसी का फरसा नहीं निकला ! वीरता केवल
Swarn Singh
Apr 194 min read


विधवा माँ
याद करो वो बदबूदार कमरा,
धूल-धूसरित मेरा बिस्तरा,
उम्र की लाचारी,
और मैं विधवा, बेचारी I
Swarn Singh
Apr 151 min read


गाँव का सूनापन:-कहाँ गए सब लोग ?
खेत, पेड़, घर, आँगन, चारदीवारी और चौखट, सब पर सन्नाटा ठहर गया, रोटी की ख़ातिर वो पूरा कुनबा गांव छोड़ बसने 'शहर' गया I For complete Poem read My Book " हमें और मत बाँटो'
Swarn Singh
Apr 151 min read


छोटी छोटी बात
हर एक बात पर, मत इतना विवाद किया करो, छोटी-छोटी बात के लिए न फरियाद किया करो। ये ज़िंदगी चंद लम्हों की मेहमान है प्यारों, यूँ नफ़रतों में इसे न बर्बाद किया करो। For complete Poem read My Book " हमें और मत बाँटो'
Swarn Singh
Apr 151 min read


परदे की बातें
भीड़ में शोर मचाने से अक्सर उलझ जाते हैं खून के भी रिश्ते, कुछ गिले शिकवे खामोशी से ही सह लें, तो अच्छा लगता है , लफ़्ज़ों के जाल में अक्सर बातों के मतलब बदल जाते हैं, जो बात नज़रों से नज़रों तक ही बहे, तो अच्छा लगता है ! For complete Poem read My Book " हमें और मत बाँटो'
Swarn Singh
Apr 151 min read


चार दोस्त, मयख़ाना और रात का समाँ
चार दोस्त, मयखाना, और रात का समां, शराब की चुस्कियों में छुपा हर गम का बयां ! हंसी-ठिठोली, और कहानियों का सिलसिला, और तेरी खूबसूरती के किस्सों का रंगीला काफिला ! For complete Poem read My Book " हमें और मत बाँटो'
Swarn Singh
Apr 151 min read


ये कैसा भाईचारा है ?
संसद से बाज़ारों तक, जो बारूद तुमने बिछाया है, सच कहो, क्या यही तेरे मजहब ने तुमको सिखाया है? मेरे बच्चों के जिस्मों के जब चीथड़े उड़ जाते हैं, तब तुम्हारे ये अमन के नारे और भाईचारे कहाँ मर जाते हैं?
Swarn Singh
Apr 151 min read


इंसा को इंसा रहने दे
न "काफ़िर" कह, न "गैर" समझ, बस इंसाँ को इंसाँ रहने दे, नफ़रत की जो आँधी आई, उसमें खुद को मत बहने दे। बाँट रहे जो ज़हर दिलों में, उनकी साज़िश तू पहचान, सबका ईश्वर एक ही है, इस सच से मत हो अनजान I
Swarn Singh
Apr 151 min read


ग़फ़लत में मत रहना
किसी ग़फ़लत में मत रहना, तेरी हर साज़िश को बेनक़ाब कर देंगे, अब तक जितना भी दर्द दिया है तूने, सबका हिसाब कर देंगे ! ख़ामोशी मेरी फ़ितरत है, इसे मेरी हार मत समझ लेना, जिस दिन ये समंदर उफनेगा, हर किनारे को सैलाब कर देंगे !
Swarn Singh
Apr 151 min read
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