चार दोस्त, मयख़ाना और रात का समाँ
- Swarn Singh
- Apr 15
- 1 min read
Updated: Apr 27
चार दोस्त, मयखाना, और रात का समां,
शराब की चुस्कियों में छुपा हर गम का बयां !
हंसी-ठिठोली, और कहानियों का सिलसिला,
और तेरी खूबसूरती के किस्सों का रंगीला काफिला !
For complete Poem read My Book " हमें और मत बाँटो'





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