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मजदूर दिवस की शुरुआत कैसे हुई?

Updated: May 5

तपती धूप में खुद को जलाकर,

वो औरों का घर सजाता है,

नसीब उसका मिट्टी में है,

फिर भी वो सोना उगाता है।

मज़बूत इरादे और थके पाँव,

यही उसकी असल पहचान है,

न थकता है न झुकता है,

वो इस जमीं का मान है।

वो नींव का पत्थर है साहब,

जो शोर कभी नहीं करता,

उसी के दम पर खड़ा ये सारा,

बुलंद हिंदुस्तान है।

मजदूर दिवस (अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस या मई दिवस) हर साल 1 मई को मनाया जाता है। यह दुनिया भर के मजदूरों के अधिकारों, उनके संघर्ष और बलिदान को समर्पित दिन है।

इसकी जड़ें 19वीं शताब्दी के अमेरिका में हैं, जहाँ औद्योगिक क्रांति के दौरान मजदूरों को बहुत लंबे समय तक काम करना पड़ता था अक्सर 12 से 16 घंटे या उससे भी ज्यादा। मजदूर यूनियनों ने 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे मनोरंजन की मांग की। 1884 में अमेरिका और कनाडा की मजदूर संगठनों (Federation of Organized Trades and Labor Unions, बाद में American Federation of Labor) ने फैसला लिया कि 1 मई 1886 से 8 घंटे का काम कानूनी रूप से तय हो जाना चाहिए।

1 मई 1886 को अमेरिका के कई शहरों में, खासकर शिकागो में, लाखों मजदूरों ने हड़ताल की। सैकड़ों हजारों मजदूरों ने काम बंद कर दिया और प्रदर्शन किए। 4 मई 1886 शिकागो के हे मार्केट स्क्वायर में मजदूरों की एक सभा चल रही थी। पुलिस ने सभा तितर-बितर करने की कोशिश की। तभी किसी अज्ञात व्यक्ति ने बम फेंका , जिसमें कई पुलिस वाले मारे गए। पुलिस ने जवाब में भीड़ पर गोली चलाई, जिसमें कई मजदूर मारे गए और सैकड़ों घायल हुए।

इस घटना के बाद 8 मजदूर नेताओं को गिरफ्तार किया गया। चार को फाँसी दी गई (जिन्हें बाद में "हे मार्केट शहीद" कहा जाने लगा), एक ने जेल में आत्महत्या कर ली। इस घटना ने दुनिया भर में मजदूर आंदोलन को नई प्रेरणा दी।

1889 में पेरिस में द्वितीय अंतरराष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन (Second International) में फैसला लिया गया कि 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए। यह फैसला हे मार्केट घटना की याद में और 8 घंटे काम की मांग को समर्थन देने के लिए लिया गया।

1890 में पहली बार कई देशों में 1 मई को मजदूर दिवस मनाया गया।

आज दुनिया के ज्यादातर देशों (भारत सहित) में 1 मई को मजदूर दिवस सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। अमेरिका और कनाडा में इसे सितंबर के पहले सोमवार को "Labor Day" के रूप में मनाते हैं, क्योंकि मई दिवस को "बहुत radical" माना गया था।

भारत में पहली बार 1 मई 1923 को चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में मनाया गया। लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान के नेता सिंगारवेलु चेट्टियार ने मद्रास हाई कोर्ट के सामने और समुद्र तट पर सभाएँ आयोजित कीं। इस मौके पर लाल झंडा भी पहली बार इस्तेमाल हुआ।

मजदूर दिवस सिर्फ छुट्टी नहीं है। यह उन संघर्षों की याद दिलाता है जिनकी वजह से आज 8 घंटे काम का नियम, साप्ताहिक अवकाश,न्यूनतम मजदूरी ,श्रम कानून जैसे अधिकार मिले। यह मजदूर एकता, अधिकारों की लड़ाई और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों का प्रतीक है।

श्रमिकों के योगदान को सलाम!

 
 
 

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"भूख की कोई जाति नहीं,
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