इंसा को इंसा रहने देSwarn SinghApr 151 min readRated NaN out of 5 stars.न "काफ़िर" कह, न "गैर" समझ, बस इंसाँ को इंसाँ रहने दे,नफ़रत की जो आँधी आई, उसमें खुद को मत बहने दे।बाँट रहे जो ज़हर दिलों में, उनकी साज़िश तू पहचान, सबका ईश्वर एक ही है, इस सच से मत हो अनजान I
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