फ़ितरतSwarn SinghApr 131 min readRated NaN out of 5 stars.यहाँ झूठ के बाज़ार में रिश्तों के ऊँचे दाम मिलते हैं,मगर सच बोलने वालों को सिर्फ़ इल्ज़ाम मिलते हैं !यहाँ रुतबे को और शोहरत को सौ सलाम मिलते हैं,मगर किरदार वालों को तो ताने सुबह-शाम मिलते हैं !
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