इंसान को सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह 'बोल' सकता है, इसलिए वह श्रेष्ठ है। जबकि हकीकत यह है कि हमारी बोलियों ने हमें जितना अलग किया है, उतना सरहद की कटीली तारों ने भी नहीं किया ! मैं देश के कई राज्य में रहा हूं और लगभग बहुत सारे राज्यों में घूम चुका हूं मैने देखा सुदूर पूर्वोत्तर के किसी गाँव में कुत्ता भौंकता है, तो उसकी आवाज़ महाराष्ट्र के कुत्ते से अलग नहीं होती। कोयल चाहे बंगाल में गाए या पंजाब में, उसकी “कुहू” एक-सी मधुर रहती है। कौवा बिहार का हो या केरल का, उसकी “कांव-कांव”